Nat Habit Unveils ‘Breathe Life’: A Bold New Identity Redefining The Power Of Natural Beauty
~Marking a confident evolution from Fresh Ayurveda to Breathe Life, Nat Habit’s rebrand brings power, authority, and boldness to 100% natural beauty.~ Nat Habit, one of India’s most trusted and fastest-growing beauty and wellness brands rooted in Ayurveda, today announced a major brand transformation with the unveiling of its new identity and philosophy: “Breathe Life.” Evolving from its original positioning as ‘Fresh Ayurveda,’ the rebrand reflects Nat Habit’s transformation from a natural skincare pioneer to a powerful, purpose-led beauty movement. With this strategic refresh, Nat Habit introduces a new logo, visual language, and packaging system that together embody the brand’s promise: “We don’t just make beauty more natural. We breathe life into your beauty.” The rebrand goes beyond aesthetics; at its core lies a powerful philosophy: Breathe Life. It reflects Nat Habit’s belief that beauty should be nurturing yet...
Read Moreअल्ट्राटेक व मीडिया मर्चेंट का सराहनीय पहल, पटना में छठ पूजा के बाद घाटों पर स्वच्छता अभियान की शुरुआत
चार दिवसीय छठ महापर्व के समापन के बाद बुधवार को सुबह राजधानी पटना के दीघा घाट से सफाई अभियान की शुरुआत की गई। सोमवार रात और मंगलवार तड़के लाखों श्रद्धालुओं ने सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर छठ व्रत पूर्ण किया। छठ महापर्व पर गंगा घाट किनारे आस्था का सैलाब उमड़ता है और जाहिर सी बात है महापूजा के श्रद्धा भाव से मनाए जाने के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा पूजा सामग्री जल में या घाट के किनारे ही भूलवश छोड़ दी जाती है जाहिर सी बात है छोड़ दी गयी सामग्रियों से कुछ दिनों बाद बदबू व गंदगी फैल जाती है। जिससे निबटने के लिए अल्ट्राटेक सीमेंट व मीडिया मर्चेंट ने साझा व सराहनीय कदम उठाया व पटना के घाटों पर स्वच्छता अभियान की शुरुआत कर दी है। पटना के दीघा घाट पर इस अभियान की सफल शुरुआत की गई है...
Read MoreHridaynath Mangeshkar Honours Legacy Of Love & Reverence On Entering His Glorious 89th Year With Didi Aani Mee
The lights dimmed at Pandit Deenanath Mangeshkar Sabhagruha, but silence came first — not the silence of emptiness, but the silence before prayer. Didi Aani Mee was not a concert; it felt like a return to a home built of notes and memory. It honoured Bharat Ratna Lata Mangeshkar and heralded the 89th birthday of Bhav Gandharva Pandit Hridaynath Mangeshkar — the younger brother who still speaks of her as an elder, a mentor, a divine force. The Mangeshkar family — Hridaynath Mangeshkar, Bharati Mangeshkar, Usha Mangeshkar, Meena Mangeshkar, Adinath Mangeshkar — were present as guardians of an inheritance crafted by discipline, humility and sacred silences. Hon. Ashish Shelar, Dr. Anil Kakodkar, Swami Janmejayraje Vijaysinhraje Bhosale Maharaj of Akkalkot, Gautam Thakur, and artistes Roopkumar and Sonali Rathod were present — not merely as guests, but as witnesses to history breathing...
Read Moreदिदी आनी मी – संगीत, स्मृति और सम्मान की मधुर संध्या, जहां पंडित ह्रदयनाथ मंगेशकर ने अपने 89वें वर्ष की शुरुआत पर भारत रत्न लता मंगेशकर के प्रति प्रेम और कृतज्ञता को प्रणाम किया
मुंबई के पंडित दीनानाथ मंगेशकर सभागृह में जब रोशनी धीमी हुई, तो सबसे पहले शांति उतरी — वह शांति जो आरती से पहले होती है, स्मरण से पहले होती है। ‘दिदी आनी मी’ सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह स्वर और स्मृति से सजे हुए उस घर की वापसी थी, जिसका नाम है — लता मंगेशकर। इसी भावनाओं से भरे वातावरण में पंडित ह्रदयनाथ मंगेशकर ने अपने जीवन के 89वें वर्ष में प्रवेश किया — वही ह्रदयनाथ जी, जो आज भी अपनी बहन को आदर से “दिदी” कहकर याद करते हैं। मंच पर मंगेशकर परिवार की उपस्थिति स्वयं विरासत की प्रतीक थी — पंडित ह्रदयनाथ मंगेशकर, भारती मंगेशकर, उषा मंगेशकर, मीना मंगेशकर और आदिनाथ मंगेशकर। इनके साथ माननीय अशिष शेलार, प्रतिष्ठित वैज्ञानिक डॉ. अनिल काकोडकर, अक्कलकोट राजघराने के स्वामी जंजमेयराजे विजयसिंहराजे भोसले महाराज, सारस्वत बैंक के सीएमडी गौतम...
Read More‘दिदी आणी मी’ — संगीत, स्मृती आणि स्नेहाचा सोहळा, पं. ह्रदयनाथ मंगेशकर यांनी भारतरत्न लता दीदींच्या प्रेम व परंपरेला दिलेली कृतज्ञ अभिवादनाअंतर्गत त्यांच्या ८९ व्या वर्षात प्रवेशाचा भावपूर्ण उत्सव
पंडित दीनानाथ मंगेशकर सभागृहात दिवे मंदावले आणि पहिल्यांदा शांतता उतरली — रिकामेपणाची नाही, तर प्रार्थनेपूर्वीची. ‘दिदी आणी मी’ हा केवळ एक कार्यक्रम नव्हता; तो सुरांच्या घरात पुन्हा परतण्याचा क्षण होता. हा सोहळा भारतरत्न लता मंगेशकर यांना समर्पित होता आणि त्याच वेळी भाऊगंधर्व पंडित ह्रदयनाथ मंगेशकर यांच्या ८९ व्या वर्षाच्या प्रारंभाचा साक्षीदारदेखील होता — तेच ह्रदयनाथजी, जे आजही त्यांना ‘दिदी’ म्हणूनच स्मरतात — मार्गदर्शक, प्रेरणास्रोत, आणि कृपेचे अधिष्ठान. ह्रदयनाथ मंगेशकर, भारती मंगेशकर, उषा मंगेशकर, मीनाताई मंगेशकर, आदिनाथ मंगेशकर — हे सर्व परिवारातील ज्येष्ठ आणि वारशाचे संरक्षक उपस्थित होते. या क्षणाचे साक्षीदार होते — मा. अशिष शेलार, डॉ. अनिल काकोडकर, अक्कलकोट संस्थानचे महाराज श्री स्वामी जंजमेयराजे विजयसिंहराजे भोसले, गौतम ठाकूर, रूपकुमार आणि सोनाली राठोड — पाहुणे म्हणून नव्हे, तर इतिहासाला साक्ष देणारे साक्षीदार म्हणून. जेव्हा ह्रदयनाथजी बोलायला उठले, त्यांचे शब्द बहिणीला वाहिलेल्या शांत प्रार्थनेसारखे वाटले. त्यांनी सांगितले — “आमच्यासाठी दिदी म्हणजे...
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